लाहौर में स्थित 265 साल पुरानी यह मस्जिद बयाँ करती है मुग़ल वास्तुकला की कहानी

मुगलों के बारे में हर कोई जानता है. मुग़ल वास्तुकला,चित्रकला,व्यंजनकला और अन्य भी कई प्रकार की कलाओं के दीवाने रहे हैं. अब चाहे वह बाबर हो या अकबर या फिर अपनी प्रेमिका की याद में सबसे खूबसूरत इमारत ताजमहल बनवाने वाले शाहजहाँ.. हर किसी का नाम किसी विशेष स्मृति से जुड़ा हुआ है. मुगलों ने भारत में भी लाल किला, बाबरी मस्जिद,जामा मस्जिद और ताजमहल जैसी कई खूबसूरत इमारतें बनवाई हैं जो वर्तमान समय में पर्यटकों खासकर विदेशी पर्यटकों को अपनी ओर लुभाती है.

भारत की तरह पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में भी मुगलों की कलाओं के अनेकों उदाहरण हैं, जिनमे सुनहरी मस्जिद का नाम सबसे पहले आता है…सुनहरी या गोल्डन मस्जिद पाकिस्तान के लाहौर के दिल में स्थित है जो भारत-इस्लामी मुगल वास्तुकला का एक जीवित उदाहरण है. सुनहरी मस्जिद को 1753 में मुगलों द्वारा बनवाया गया था जो की लाहौर के कश्मीरी बाजार में स्थित है जिसमे तीन गोल्डन गुम्बद हैं.

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किसने बनायीं यह मस्जिद :

मोहम्मद शाह के शासनकाल के दौरान लाहौर के उप गवर्नर रौशन-उद-दौला तुरुबाज खान के पुत्र नवाब सैय्यद भिकारी खान इस मस्जिद के वास्तुकार थे.

गोल्डन मस्जिद सिख वास्तुकला के प्रभाव को भी प्रतिबिंबित करता है .. मस्जिद में संगमरमर के गुंबद सात कक्षों को कवर करते हैं. कहा जाता है की सिख समुदाय ने मस्जिद पर एक समय कब्ज़ा कर लिया था लेकिन फिर बाद में इसे  मुसलमानों को सौंप दिया गया.

अल अरेबिया की खबरों के अनुसार उपासना के अलावा, मस्जिद अपनी विरासत और स्थापत्य महत्व को संरक्षित रखने के लिए बंद कर दी जाती है और यह मस्जिद पर्यटकों के लिए भी नहीं है.

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