दुनिया के इन खतरनाक नरसंहारों में तड़प-तड़प कर मरे थे लाखों लोग

नरसंहार, एक ऐसा शब्द जिसे देख रूह कांपने लगती है . इस शब्द शाब्दिक तात्पर्य समूह में मारे जाने वाले व्यक्तियों से है. यह हत्याएँ अकारण, निजी स्वार्थ हेतु अथवा अपराध या युद्धजनित हो सकती हैं. दुनिया में कई प्रकार के नरसंहार हुए हैं जिनके बारे में सुन कर ही डर सा लगने लग जाता है. आज आपको इंटरनेशनल न्यूज हिंदी दुनिया में हुए गए खतरनाक नरसंहार के बारे में बताएगा…

एडॉल्फ हिटलर और उसके सहयोगियों ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यहूदियों को जड़ से मिटाने का फैसला किया. और उन्हें एक जगह इकट्ठा करने और मार डालने के लिए पोलैंड में विशेष कैंप स्थापित किए गए. युद्ध के छह साल के दौरान नाजियों ने तकरीबन 60 लाख यहूदियों की हत्या कर दी, जिनमें 15 लाख बच्चे थे. इस नरसंहार में यूरोप के एक-तिहाई यहूदियों की हत्या कर दी गई थी.


रवांडा का नरसंहार भी दुनिया के खतरनाक नरसंहार में से एक है.यह नरसंहार यूरोपीय देशों की गंदी राजनीति का एक उदाहरण भी है क्‍योंकि उन्होंने इसे रोकने की कोशिश नहीं की थी. यह जननरसंहार तुत्सी और हुतु समुदाय के लोगों के बीच हुआ एक जातीय संघर्ष था. 1994 में 6 अप्रैल को किगली में हवाई जहाज पर बोर्डिंग के दौरान रवांडा के राष्ट्रपति हेबिअरिमाना और बुरुन्डियान के राष्ट्रपति सिप्रेन की हत्या कर दी गई थी जिसके बाद ये नरसंहार शुरू हुआ और करीब 100 दिनों तक चलता रहा. इस नरसंहार में 5 लाख से लेकर दस लाख लोग मारे गए. तब ये संख्या पूरे देश की आबादी के करीब 20 फीसदी के बराबर थी.



चीनी नरसंहार दुनिया के सबसे क्रूरतम नरसंहारों में से एक है और इस नरसंहार के पीछे थी चीनी साम्‍यवादी नेता माओत्‍सेतुंग की नीतियां. चीन में 1966 से लेकर 1976 तक सांस्‍कृतिक क्रांति के नाम पर लोगों को कत्ल किया गया. इस नरसंहार में सरकार विरोधी लाखों लोगों को मौत के घाट उतार दिया गया. जबकि करोड़ों लोग तो केवल माओत्‍से तुंग के शासनकाल में ही मार दिए गए थे.


रूसी तानाशाह जोसेफ स्‍टालिन ने भूमि सुधार कार्यक्रम में सभी खेतों का सरकारीकरण करने का फैसला लिया. सरकार इससे अनाज उत्‍पादन बढ़ाना चाहती थी, लेकिन इसका उल्‍टा हो गया. 1932 में रूस में बहुत ही कम अनाज का उत्‍पादन हुआ. जिससे अकाल पड़ गया. मानव सभ्‍यता की सबसे बड़ी त्रासदियों में से यह एक था. सबसे ज्‍यादा हालत यूक्रेन में खराब हुई जहां इस अकाल को होल्‍डोमोर कहा जाने लगा इसका अर्थ था भूख से समूह मृत्‍यु. इस अकाल से 5 से 6 करोड़ लोगों की मौत हो गई.

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